ऐसा मकाम है जहां तक किसी को भी जाने की इजाजत नहीं है. तमाम उलूम व फनून वहां मुनक्ता हो जाते हे. फरिश्तों की भी वहा रसाई नहीं है. अगर कोई फरिश्ता इस की हद से आगे बढ़े तो उसके पर जल जाते है। सीवाय हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम के वहां कोई नहीं पहुंचा।






