खालीके कायनात अल्लाह ताला ने सबसे पहले नूर ए मोहम्मदी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को तकलीफ फरमाया। जो 1000 साल तक अल्लाह ताला की तस्बीह व तहलील के साथ तवाफ करता रहा
अल्लाह ताला ने उस नूर से चार किस्म के अनासीर पैदा किया
१) पहली किस्म : पहले किम से अर्शे आजम पैदा किया फिर उससे सात आसमान ( एक आसमान का फासला दूसरे से 500 बरस की मूसाफत) फिर जमीन बनाई जमीन के भी सात तबकात बनाएं हर तबके का फासला दूसरे से 500 बरस मूसाफ़त का है
२) दूसरी किस्म : दूसरी किस्म से कलम बनाया, फिर लोह बनाया फिर कलम को हुक्म हुआ लिख, "बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम"। कलम ने बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम लिखने के बाद कहा अब क्या लिखु? हुक्म हुआ, "ला इलाहा इल्लल्लाह" कलम ने लिखना शुरू किया 1000 साल तक लिखता रहा जब मोहम्मद-उर-रसूलुल्लाह लिखना शुरू किया तो मारे हैबत के उसका मुंह शक हो गया फिर 1000 साल तक लिखा।
३) तीसरी किस्म : तीसरी किम से जन्नत और दोजख बनाई
४) चौथी किस्म : इससे फरिश्ते, जिन्नात, आलमें अरवाह पैदा किया। फरिश्तों को आसमान पर और जिन्नात को जमीन पर बसाया। जिन्नात जमीन पर 7000 साल तक आबाद रहे फिर उनमें फसाद बरपा हो गया यहां तक के खून रेस जंग शुरू हो गई जिसकी वजह से अल्लाह ने उन्हें पहाड़ों और जजीरा में बसाया जो हमेशा के लिए वही आबाद हो गए
लोह-ए -महफूज :
लोह-ए -महफूज के अंदर तमाम मखालूक की तकदीर लिखकर महफूज कर दी गई है. इसको लोह-ए -महफूज इसलिए भी कहा जाता है कि शैतान के सर से महफूज है. लोह-ए -महफूज की जिल्द सफेद मोतियों से, वर्क सुर्ख याकूत से और हरफ सुर्ख मोतियों से बनाए गए हैं वो सातवे आसमान पर मौजूद है
लोह-ए -महफूज की लंबाई 700 बरस और चौड़ाई मशरिक से मगरिब तक की मुसाफत की है. लोह-ए -महफूज का कलाम नूर से, लोह-ए -महफूज में लिखा हुआ कुरान का हर हर्फ़ कोहे काफ के बराबर है. लोह-ए -महफूज में सहीफे सुर्ख याकूत से लिखे हैं.
लोह-ए -महफूज का कलम :
कलम एक सफेद चमकदार मोती से बनाया है जो लोह-ए -महफूज से बंधा है. कलम 700 साल के मुसाफत के बराबर है. कलम की 12 किस्म है जो मुख्तलीफ काम के लिए मुकर्रर है. कुदरत, तकदीर, वही, जिस्म की हिफाजत, रिज़्क़, हुकुम, हुकूक, तवारीख, दिन रात की गर्दिश, चांद सूरज की गर्दिश, लुगत, तमाम अकलाम जिससे निजामें आलम चलता है






