हजरहते अब्बास रजी अल्लाह ताला अन्हा से रिवायत है के आसमान से पहेले जमीन वजूद मे आई. बाद में इसमें तब्दीली हुई. जमीन पहले पानी थी. कुदरत ने उस पर झाग पैदा किया। वह झाग 40 साल तक साकीत रहा. फिर उस झाग को फयला दिया गया. वह सुख कर जमीन बन गई.
सबसे पहले जमीन वाहा बनी जहां आज खानए काबा है. जमीन का फयलाव पांच सो साल की मूसाफ्त का हे. जीस मैं तीन हिस्से पानी और एक हिस्सा खुश्की का है.
अल्लाह ताला ने जमीन की हरकत रोकने के लिए
उस पर पहाड़ रख दीए, जिन मैं चंद
पहाड़ यह है:१) कौहै काफ (२)कोहे जूदि (३) कोहै अबुल कबीस (४) कोहे लुबनान (५)कोहै
तूर (६)कोहे सीना वगैरा
एक रिवायत के मुताबिक बड़े-बड़े पहाड़ों की तादाद 6673 है. जिनमें सुनहैरा बएतुल मुकद्दस जमीन का वह हिस्सा है जो सबसे बुलंद है और आसमान से सबसे जादा करीब है. जमीन पर सबसे पहले पहाड़ मक्का मुकर्रमा मैं अबुल कबीस है.
जमीन के सात तबकात है:
पहले तबके में इंसान बसते है, दूसरे में हवा, तीसरे में ऐसी माखलूक है जिन के चेहरे इंसानो की तरहा, मुंह कुत्ते की तरहा, पैर बैलो की तरह और जिस्म पर बाल भेड़ की उन की तरहा है.
चौथे तबके में गंधक और पत्थर जो दोजखियों के लिए है.
पांचवें तबके मैं सांप और बिच्छू है.
छट्टे में कुफ्फार की रुहै और सातवें में इब्लीस और उस का लश्कर है.
जब हजरत आदम अलैहिस्सलाम का पुतला तैयार करने के लिए अल्लाह ताला ने हजरत इजराइल को जमीन पर मुख्तलिफ मकामात से मिट्टी लेने के लिए भेजा और उस वक्त मदीना मुनव्वरा में, जिस मकान पर अब मस्जिद ए नबवी है, वहां जन्नत का टुकड़ा भेज दिया ताके अपने हबीब सल्लाहु अलेही वसल्लम का जिसमे अतहर उसी मिट्टी से तैयार हो, और वो वही दफन हो. इसलिए मस्जिद ए नबवी मैं एक जगहां थोड़ी सी जन्नत के टुकड़े में से है, जिसे जन्नत की कीयारि या (रियाजुल जन्नाह) कहा जाता है. जमीन के उस हिस्से पर दौ रकात नमाज पढ़ना बेहद अफज़ल है.






